क्या है FEMA और FERA कानून? (FEMA And FERA In Hindi)

फेमा और फेरा विदेशी विनमय (Foreign Exchange) से जुड़े दो कानून है जिनके बारे में सभी को पता होना चाहिए| आज इस आर्टिकल में हम यह भी जानेंगे कि Fema और Fera के बीच क्या अंतर है?

लेकिन इससे पहले हमें कुछ और तथ्य जान लेना आवश्यक है जैसे Foreign Exchange क्या है? तथा मुद्रा का अवमूल्यन क्या होता है? तो चलिए इसी के बारे में बात करते है|

विदेशी विनिमय तथा नियंत्रण (Foreign Exchange and control)

विभिन्न देशों की मुद्रा को आपस में परिवर्तनशील बनाना ही विदेशी विनिमय या Foreign Exchange है| विनिमय दर का निर्धारण एक जटिल प्रक्रिया है|

विनिमय दर (Exchange rate) वह अनुपात है जिसमे एक देश की मुद्रा दूसरे देश की मुद्रा में बदली जाती है|

क्राउथर के अनुसार “विनिमय दर एक देश की मुद्रा के बदले दूसरे देश की कितनी मुद्राएं मिल सकती हैं, इसी की माप है|

सेयर्स के अनुसार “चलन मुद्राओं के परस्पर मूल्यों को ही विदेशी विनमय दर या foreign exchange rate कहते है|

Exchange rate के प्रकार

Free Floating

एक Free Floating विनिमय दर विदेशी मुद्रा बाजार में परिवर्तन के कारण बढ़ती और गिरती है। यह एक्सचेंज रेट मांग और पूर्ति के आधार पर निर्धारित होती है|

Restricted Currencies | प्रतिबंधित मुद्राएं

कुछ देशों ने मुद्राओं को प्रतिबंधित कर दिया है, जिससे उनके विनिमय को देशों की सीमाओं के भीतर सीमित कर दिया गया है। साथ ही, एक प्रतिबंधित मुद्रा का मूल्य सरकार द्वारा निर्धारित किया जा सकता है।

Currency Peg

कभी-कभी एक देश अपनी मुद्रा को दूसरे राष्ट्र की मुद्रा से जोड़ देता है। उदाहरण के लिए, हांगकांग डॉलर अमेरिकी डॉलर से 7.75 से 7.85.2 की सीमा में जुड़ा हुआ है| इसका मतलब है कि अमेरिकी डॉलर के मुकाबले हांगकांग डॉलर का मूल्य इस सीमा के भीतर रहेगा।

मुद्रा का अवमूल्यन (Devaluation of currency)

किसी देश की मुद्रा के बाह्य मूल्य में कमी होना ही मुद्रा का अवमूल्यन कहलाता है|

उदहारण के लिए 1 डॉलर का मूल्य 45 रहा हो, और अब 1 डॉलर 75 रूपये के बराबर हो गया है तो यह रुपये के अवमूल्यन को दर्शाता है|

जब अवमूल्यन किया जाता है तब विदेशी मुद्रा का मूल्य घरेलु मुद्रा के मुकाबले बढ़ जाता है|

इसके कारण देश में आयतों की कीमत बढ़ जाती है तथा निर्यातों की विदेशों में कीमत घट जाती है|

मुद्रा का अधिमूल्यन

यह अवमूल्यन की विपरीत स्थिति है| अधिमूल्यन में मुद्रा की बाह्य मूल्य को अधिक कर दिया जाता है|

मुद्रा के अधिमूल्यन के दौरान देश के निर्यात में कमी आती है जिसके कारण बेरोजगारी बढ़ने की भी सम्भावना रहती है|

FERA क्या है?

FERA का फुलफार्म Foreign Exchange Regulation Act या विदेशी विनिमय नियमन अधिनियम है|

आज़ादी के बाद भारत में विनिमय नियंत्रण को स्थाई रूप देने के लिए फेरा (Fera) कानून पास किया गया| जिसके अंतर्गत कोई भी व्यक्ति या संस्था रिज़र्व बैंक की अनुमति से ही foreign exchange खरीद सकता है|

FEMA क्या है?

FEMA का फुलफार्म Foreign Exchange Management Act या विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम है|

साल 1991 के आर्थिक संकट के बाद देश की अर्थव्यवस्था में उदारीकरण की नीति अपनाई गईजिसके परिणाम स्वरुप अंतर्राष्ट्रीय व्यापार आसान हो गया।

किन्तु इसके क्रियान्वयन के लिए विदेशी मुद्रा के बेहतर प्रबंधनऔर विकास की आवश्यकता थी।

अंततः एक नया कानून अस्तित्व में आया FEMA, जो विदेशी मुद्रा के मैनेजमेंट पर बल देता है|

ED इस प्रवर्तन निदेशालय का मुख्य कार्य फेमा को लागु करना है|

FEMA और FERA में अंतर

यदि हम दोनोंअधिनियमों के मुख्य अंतर की बात करें तो FERA विदेशी मुद्रा के संरक्षण की बात करता था, वहीं FEMA का मुख्य उद्देश्य देश में विदेशी मुद्रा का प्रबंधन और विकास करना है।

FERA के प्रावधानों का उल्लंघन करने पर कठोर दंड की व्यवस्था थी, जबकि FEMA के प्रावधानों के उल्लंघन पर केवल आर्थिक दंड या जुर्माने की व्यवस्था है|

जहाँ FERA के अंतर्गत दोषसिद्धि का दायित्व व्यक्ति पर होता था वहीं FEMA के आने के बाद यह दायित्व जाँच एजेंसी पर होगा।

FEMA और FERA: अंतर और विवरण

भारत में विदेशी मुद्रा (Foreign Exchange) को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने दो प्रमुख कानून बनाए:

  1. FERA (Foreign Exchange Regulation Act), 1973

  2. FEMA (Foreign Exchange Management Act), 1999

1. FERA (विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम), 1973

परिचय:
FERA को 1973 में लागू किया गया था ताकि भारत में विदेशी मुद्रा की लेन-देन को नियंत्रित और विनियमित किया जा सके। इसका मुख्य उद्देश्य विदेशी मुद्रा के दुरुपयोग को रोकना और भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करना था।

मुख्य बिंदु:

  • FERA बहुत कठोर कानून था, और इसका पालन न करने पर आपराधिक दंड का प्रावधान था।

  • आरबीआई (RBI) की अनुमति के बिना विदेशी मुद्रा में कोई भी लेन-देन प्रतिबंधित था।

  • इस कानून का उद्देश्य विदेशी मुद्रा को बचाना और नियंत्रित करना था, न कि इसे बढ़ावा देना।

  • इसके तहत निजी निवेश और विदेशी कंपनियों की भागीदारी पर सख्त नियंत्रण था।

समस्याएँ:

  • यह बहुत सख्त था, जिससे व्यापार और निवेश पर बुरा प्रभाव पड़ा।

  • वैश्वीकरण और आर्थिक सुधारों के चलते इसे 1999 में FEMA से बदल दिया गया

2. FEMA (विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम), 1999

परिचय:
FEMA को 1999 में लागू किया गया ताकि भारत में विदेशी मुद्रा के प्रवाह को आसान और उदार बनाया जा सके। यह कानून आर्थिक उदारीकरण और वैश्वीकरण को ध्यान में रखकर बनाया गया था।

मुख्य बिंदु:

  • लचीला और उदार कानून जो विदेशी निवेश को प्रोत्साहित करता है।

  • इसका उद्देश्य विदेशी मुद्रा के प्रबंधन को आसान बनाना है, न कि केवल उसे नियंत्रित करना।

  • इसके उल्लंघन पर नागरिक दंड लगाया जाता है, जबकि FERA में आपराधिक दंड का प्रावधान था।

  • भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) और भारत सरकार विदेशी मुद्रा लेन-देन की देखरेख करते हैं।

FERA और FEMA के बीच मुख्य अंतर:

विषय FERA (1973) FEMA (1999)
लक्ष्य विदेशी मुद्रा को नियंत्रित करना विदेशी मुद्रा प्रबंधन को आसान बनाना
कठोरता बहुत सख्त कानून लचीला और उदार कानून
दंड का प्रकार आपराधिक दंड नागरिक दंड
विदेशी निवेश प्रतिबंधित और सीमित प्रोत्साहित और उदार
सरकारी हस्तक्षेप अधिक नियंत्रण कम नियंत्रण

निष्कर्ष:

FEMA को FERA की जगह लाया गया ताकि वैश्विक निवेश को बढ़ावा मिले और भारतीय अर्थव्यवस्था का विकास हो सके। आज, FEMA के तहत भारत में FDI (Foreign Direct Investment) और विदेशी व्यापार को सुगम बनाया गया है, जिससे देश की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है।

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